
अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध का भारत में कितना पड़ रहा असर
अमेरिका, इजराइल-ईरान युद्ध यों तो हमारे देश से सैकड़ों किलोमीटर दूर चल हो रहा है। लेकिन भारत में इस युद्धा का कितना असर पड़ रहा है आज हम इस पर बात करेंगे।

हमार दुनिया
अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध कहने को तो मध्य-पूर्व में चल रहा है। और भारत का प्रत्यक्ष तौर पर इस युद्ध से कोई लेना देना नहीं है, लेकिन इसके बाद हमारे यहां इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। वस्तुओं के दाम एक-एकाएक बढ़ गए हैं। इससे लोग काफी परेशान भी हैं। देश में जमाखोर सक्रिय हो गए, जिससे कई तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं।
युद्ध के भारत पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष प्रभाव
अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण भारत के लिए तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा है, जिससे पेट्रोल-डीजल और परिवहन की लागत बढ़ रही है। खाड़ी देशों (ईरान, यूएई, कतर) में लाखों भारतीय काम करते हैं, जिन पर युद्ध का सीधा खतरा है। ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण शिपिंग मार्ग (लाल सागर) प्रभावित हो रहा है, जिससे निर्यात-आयात की लागत और समय बढ़ रहा है। अब अगर परोक्ष या अप्रत्यक्ष असर की बात करें तो भारत और अमेरिका के साथ मजबूत रणनीतिक संबंध हैं, वहीं ईरान के साथ ऊर्जा और क्षेत्रीय सहयोग के संबंध हैं। ऐसे में भारत को दोनों देशों के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है, जो एक कठिन कूटनीतिक चुनौती है। वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के कारण भारत की जीडीपी ग्रोथ धीमी हो सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण भारत पर किसी एक पक्ष को चुनने का कूटनीतिक दबाव बढ़ रहा है। जबकि ऐसा चुनाव भारत के हित में नहीं दिख रहा।
महंगाई का दिखने लगा असर
अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध के कारण महंगाई बढ़ने का असर दिखने लगा है। उसका सबसे बड़ा कारण भारत की ऊर्जा जरूरतें है। भारत लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें मध्य-पूर्व का महत्वपूर्ण योगदान है। युद्ध की स्थिति में तेल और एलपीजी गैस आपूर्ति बाधित हो रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और भारत को भी बढ़े दामों पर कच्चा तेल खरीदना पड़ रहा है। हालांकि भारत सरकार ने अभी यहां पेट्रोल के दाम नहीं बढ़ाए हैं। लेकिन व्यवसायिक गैस की आपूर्ति बंद कर दी गई और व्यवसायिक डीजल के दामों में वृद्धि कर दी गई। इसका असर यहां खाने-पीने की वस्तुओं के दाम पर पड़ा है। व्यवसाइक डीजल के दाम बढ़ने से सप्लाई चेन पर असर पड़ा है। इससे खाने-पीने की वस्तुओं सहित एलपीजी गैस, उर्वरक, सूखे मेवे, खजूर, कुछ दालें, पेट्रोकेमिकल आधारित उत्पाद, पैकेज्ड फूड, साबुन की कीमतें बढ़ रही हैं। कंटेनर का किराया बढ़ने से सामान आयात-निर्यात महंगा हो गया है। इससे घरों का बजट बिगड़ रहा है।
निवेशकों में चिंता का माहौल
अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध के कारण भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा है। निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ने से शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है। विदेशी निवेशक जोखिम से बचने के लिए अपने निवेश निकाल रहे हैं, जिससे आर्थिक अस्थिरता बढ़ रही है।

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